बालोद का कपिलेश्वर मंदिर समूह......!
2012 में दुर्ग जिले से अलग होकर बालोद एक नया जिला बना है। बालोद जलाशयों एवं वनसंपदा से संपन्न क्षेत्र है। यहां का मुख्य कर्म कृषि है। बालोद दुर्ग से 60 किलोमीटर, धमतरी से 40 किलोमीटर एवं राजनांदगांव से 50 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। राजधानी रायपुर से बालोद 100 किलोमीटर की दुरी पर है।
बालोद पुरातात्विक स्मारकों के लिये भी प्रसिद्ध है। बालोद शहर के अंतिम छोर पर कपिलेश्वर मंदिर समूह है। इस मंदिर समूह में भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान गणेश, भगवान कृष्ण, देवी संतोषी और राम जानकी को समर्पित छः मंदिर है।
भगवान शंकर को समर्पित कपिलेश्वर मंदिर इनमें सबसे बड़ा मंदिर है। पूर्वाभिमुख इस मंदिर में सिर्फ गर्भगृह मात्र है। मंदिर का शिखर भी काफी उंचा है। दोनों तरफ भगवान गणेश की 6 फीट की प्रतिमायें स्थापित है। मंदिर के द्वारशाखा के दायें और बायें तरफ गंगा यमुना और द्वारपाल की प्रतिमायें स्थापित है।
इन मंदिरों समुहों में दुसरा मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश की छ फीट की प्रतिमा स्थापित है। इस मंदिर का शिखर उपर की ओर संकरा होता गया है। मंदिर का शिखर पीड़ा देवल प्रकार में निर्मित है।
छत्तीसगढ़ में भगवान गणेश की अनेकों प्रतिमायें मिलती है किन्तु अधिकांश प्रतिमायें खुले में या किसी मंदिर के मंडप में स्थापित प्राप्त होती है किन्तु ऐसे मंदिर बेहद की कम प्राप्त होते है जो कि सिर्फ भगवान गणेश को समर्पित है।
भगवान राम का मंदिर गर्भगृह और मंडप में विभक्त है। इसमें भगवान राम की आधुनिक प्रतिमा स्थापित है। भगवान कृष्ण और मां दुर्गा के पुराने मंदिरों में इनके आधुनिक प्रतिमायें स्थापित है। संतोषी माता का मंदिर इन सभी मंदिरों में सबसे छोटा है। इस मंदिर का शिखर पीड़ा देवल आकृति में बना हुआ है। मंदिरों के पास बावड़ी या तालाब बनाने की परंपरा यहां पर भी देखने को मिलती है।
शिव मंदिर के सामने एक बावड़ी बनी हुई है। जिसमें योद्धाओं की प्रतिमायें स्तंभों पर स्थापित है। इन मंदिरों का निर्माण काल 15 वी -16 वी सदी माना गया है।
मंदिरों के शिखर भाग पर नागों की आकृतियां अंकित है जिससे अनुमानित होता है कि यहां पर भी स्थानीय नागवंशी राजाओं का शासन रहा है। इनके शासन काल में ही इन मंदिरों का निर्माण माना गया है।
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| बावड़ी |














