अलगोजा से निकली सिन्ध की मधुर धुन......!
पता नहीं क्यों जब से सिन्ध , थार के इतिहास संस्कृति और वर्तमान परिदृश्य को समझने की कोशिश कर रहा हूं वैसे वैसे वहां की मिटटी से प्रेम होता जा रहा है। इस प्रेम के पीछे आज भी वही अपनापन छिपा हुआ है जो विभाजन से पूर्व तक था। विभाजन के बाद भले ही आज ये क्षेत्र पाकिस्तान में रह गये हो किन्तु आज भी भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से थार और सिन्ध मुझे अपने देश का हिस्सा ही महसूस होता है। पाकिस्तान के थार में आज भी राजस्थानी और सिन्धी संस्कृति की महक कायम है।
भाषा, रहन सहन , खान पान के साथ वहां का संगीत भी हमें आपस में जोड़े रखता है। सिन्ध राजस्थान में रिश्तों की मजबूती के पीछे लोकसंगीत का विशेष योगदान है। लोकवादकों के वाद्ययंत्रों से निकली हुई धुने आज भी हमें पुराने दिनों की याद दिलाती है। आज भले ही सरहदों ने हमें अलग कर दिया है किन्तु दोनों जगह आज एक सा स्वर ही सुनाई पड़ता है। पाकिस्तान के सिन्ध और भारत के राजस्थान में खासकर अलगोजा से निकली स्वर लहरियां सदियों पुराने रिश्तों में गर्माहट पैदा कर देती है।
अलगोजा शब्द में भी उतनी ही मिठास छुपी हुई जितना कि उसी निकली हुई मधुर संगीत में है। भारत में राजस्थान, गुजरात, कच्छ जैसे क्षेत्रों में आज भी अलगोजा का संगीत सुनाई पड़ता है। इसके साथ ही पाकिस्तान के सिन्ध से भी अलगोजा से निकला संगीत यहां तक सुनाई पड़ता है। वहां के अलगोजा के स्वरों में सिन्धी संस्कृति की महक भी शामिल है।
अलगोजा बाँसुरी की तरह ही होता है। किन्तु अलगोजे में दो बांसुरियां एक साथ होती है। इसमें बांसूरी की तरह ही छः छेद होते है। एक अलगोजा दुसरे की अपेक्षा दुगुना होता है। एक अलगोजे में निश्चित समय पर स्वर बजाये जाते है तो दुसरे में एक ही स्वर को कायम रखा जाता है। अलगोजा बजाना भी कोई आसान काम नहीं है। इसे लगातार बजाना पड़ता है जहां सांसे टूटी वहां अलगोजा से निकलता स्वर बिगड़ जाता है।
अलगोजा बांस या पीतल से भी बनाया जाता है। इसे मोतियों के झालरों से भी सजाया जाता है। अलगोजा जैसलमेर जोधपुर बाड़मेर बीकानेर आदि क्षेत्रों में मुख्य रूप से बजाया जाता है। भारत और सिन्ध में आज भी कई अलगोजा वादक है जिनके अलगोजे से निकली धुने पुरी दुनिया को अपना दीवाना बना चुकी है।
सिन्ध में अरबाब खोसो द्वारा बजाई गई इस अलगोजा की मधुर धुन को सुनिये, देखिये और सिन्ध की संस्कृति को महसूस कीजिये ...अलगोजा की यह धुन आपमें भी सिन्ध के प्रति प्रेम को जगा देगी।







