Tuesday, 15 July 2025

आदित्य नायक ने बनवाया था गुरुर का काल भैरव मंदिर

बारहवीं सदी में छत्तीसगढ़ के कल्चुरी और बस्तर के नागवंश के मित्रता और शत्रुता के काल में एक राजवंश का उदय हुआ। वह राजवंश था कांकेर क्षेत्र का सोमवंश। बारहवीं सदी से लेकर चौदहवीं सदी तक कांकेर क्षेत्र में सोमवंशी शासकों का शासन हुआ करता था। इस राजवंश में सिंहराज, बाघराज, कर्णराज, पंपराज, भानुदेव जैसे प्रसिद्ध और प्रतापी राजा हुए। सिहावा अंचल का कर्णेश्वर महादेव मंदिर इन्हीं सोमवंशी शासकों द्वारा निर्मित है। इन राजाओं ने अपने इस पूरे कांकेर अंचल में कई मंदिर और मूर्तियां का निर्माण कराया। ऐसा ही एक मंदिर गुरूर में भी बना हुआ। 

बालोद जिले के गुरुर गांव में एक प्राचीन मंदिर है जिसे देऊर मंदिर कहा जाता है। यह काल भैरव को समर्पित है। मंदिर गर्भगृह अन्तराल और मंडप में विभक्त है। गर्भगृह वर्तमान में रिक्त है। मंडप चार साधारण स्तंभों पर आधारित है। यह मंदिर दक्षिण के चालुक्य शैली में निर्मित है। इस आधार पर इस मंदिर को आजकल सातवीं आठवीं सदी में बना हुआ कहा जाने लगा है। मूलतः यह मंदिर बारहवीं सदी सोमवंशी राजा बाघराज के नायक आदित्य देव द्वारा निर्मित है। इस मंदिर में कालभैरव की प्रतिमा रही होगी जो अब मंदिर में नहीं है। 

इस मंदिर का अभिलेख पास के खेत में पड़ा हुआ है। जिससे मंदिर के इतिहास पर प्रकाश पड़ता है। अभिलेख नागरी लिपि और संस्कृत भाषा में है। अभिलेख का मूल पाठ रायबहादुर हीरालाल ने प्रस्तुत किया है।  अभिलेख की निचली पंक्तियां घिस गई जिसके कारण पूरा पाठ उपलब्ध नहीं है। (संदर्भ इण्डियन एंटीक्वेरी 1926 पृष्ठ 44)

स्वस्ति काकरय

परम महेश्वर 

सोम कुल तिलक 

राणक श्री वाघराज 

राज्य नायक श्री आदित्येव  

श्री उमानाथ श्री कालभैरव 

भूमि प्रदत्ता राज्य भविष्यति तस्य अहम कृत

इन पंक्तियों से स्पष्ट है कि काकरय (कांकेर) के सोम कुल तिलक राणक श्री वाघराज के राज्य में नायक श्री आदित्य ने श्री उमानाथ (शिव) और श्री कालभैरव को भूमि अर्पित की।

इस अभिलेख और सोमवंशी राजा बाघराज के शासन अवधि से स्पष्ट है कि कालभैरव का यह मंदिर इस आदित्य नायक ने बारहवीं सदी में बनवाया था। 

धमतरी से बालोद जाने वाले मार्ग में गुरुर कस्बे में यह कालभैरव को समर्पित प्राचीन मंदिर अवस्थित है। 



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आदित्य नायक ने बनवाया था गुरुर का काल भैरव मंदिर

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