डमरू छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण उत्खनन स्थल है। डमरू बलौदा बाजार से 15 किलोमीटर दुर पर रसेड़ी रसेड़ा के पास स्थित है। डमरू के पास से शिवनाथ नदी बहती है।
डमरू में पुरातात्विक उत्खनन के फलस्वरूप पुरानी बसाहट के अवशेष प्राप्त हुए है। इस ग्राम में कुछ पुराने मंदिर भी थे जिसमें से एक मंदिर पूर्णत ध्वस्त हो चुका है। ग्रामीणों ने उस पर एक नया मंदिर बना दिया है।
इसे महामाया मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में पुरानी प्रतिमायें स्थापित की गई है। उसके पास ही एक अन्य प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर लगभग 15 फीट उंचा है। मंदिर में मात्र गर्भगृह है। गर्भगृह में कोई भी प्रतिमा स्थापित नहीं है।
मंदिर की दीवारें भी बेहद सादी है। मंदिर के बाहर नंदी की भग्न प्रतिमाओं से अनुमानित होता है कि यह मंदिर शिव मंदिर रहा होगा।
पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया है। मंदिर का निर्माण काल 14 वी-15 वी सदी अनुमानित किया गया है। मंदिर परिसर में बहुत सी प्रतिमाओं के भग्नावशेष रखे हुए है। महामाया मंदिर की दीवारों पर भी पुरानी प्रतिमायें जड़ी हुई है।
डमरू ग्राम में बहुत से टीलों का उत्खनन किया गया जिसके फलस्वरूप पुरानी बसाहट के अवशेष भी देखने को मिलते है।
रायपुर से डमरू 100 किलोमीटर पर स्थित है वहीं बलौदाबाजार से डमरू 15 किलोमीटर पर स्थित है। कभी इस रास्ते में जाना हो तो डमरू जरूर जाईये।







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