वराह अवतार उदयगिरी की गुफायें विदिशा
सांची के पास ही विश्वप्रसिद्ध उदयगिरी की गुफायें है। गुप्तकाल में चटटानों को काटकर इन गुफाओं का निर्माण कराया गया था। उदयगिरी में कुल 20 गुफायें है जिनमें से कुछ गुफायें चैथी पांचवी सदी की मानी गई है। इन गुफाओं में उत्कीर्ण प्रतिमायें गुप्तकाल की मूर्तिकला की सर्वोत्तम उदाहरण है।
गुफा नं 05 जिसे वराह गुफा भी कहते है इस गुफा में भगवान विष्णु के वराह अवतार की अद्वितीय विशाल प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा का मुख वराह का एवं शेष भाग मनुष्य का है।
पुराणों के अनुसार भगवान वराह ने राक्षसराज हिरण्याक्ष से पृथ्वी को मुक्त कराया था। इसी कथा को इस वराह गुफा में उत्कीर्ण किया गया है। भगवान वराह के कंधे पर नारी रूप में पृथ्वी देवी विराजित है। भगवान वराह का एक पैर नाग राजा पर रखा हुआ है। नाग राजा हाथ जोड़े हुये भगवान वराह की ओर देख रहे है।उपर समस्त देवी देवताओं यक्ष गंधर्व किन्नरों को स्तुति गान करते हुये प्रदर्शित किया गया है।
गुप्तकाल में निर्मित भगवान वराह की यह प्रतिमा पुरे भारत में अद्वितीय प्रतिमा है जिसमें नारी रूपी पृथ्वी का उद्धार करते हुये प्रदर्शित किया गया है।


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