Thursday, 15 November 2018

सरगांव का धूमनाथ मंदिर

सरगांव का धूमनाथ मंदिर......!

सरगांव के धुमनाथ मंदिर का नाम मैने बहुत पहले ही सुन रखा था। प्रारंभ में इसकी वास्तविक स्थिति से परिचित नहीं था। यह मंदिर रायपुर से बिलासपुर जाने वाले मार्ग में सरगांव नामक ग्राम में स्थित है। दरअसल धुमनाथ नाम ने ही मेरे मन में इस मंदिर को जानने की जिज्ञासा उत्पन्न कर दी थी।



जहां अधिकांश पुराने मंदिर खुले जगहों पर देखने को मिलते है वहीं यह धुमनाथ मंदिर घनी आबादी के बीचों बीच है। मंदिर के आसपास बिलकुल भी खाली जगह नहीं है। 

बी0एल0 नागार्च सर के अनुसार धुमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। छ0ग0 संस्कृति विभाग द्वारा लगाये गये सूचना पटट में मंदिर की कुछ जानकारी मिलती है। सूचना पटट के अनुसार यह मंदिर भगवान धुमनाथ या धुमेश्वर शिव को समर्पित है जो कल्चुरी काल में निर्मित है।

 यह मंदिर पूर्वाभिमुख है। मंदिर गर्भगृह और अंतराल में विभक्त है। मंदिर का गर्भगृह अंदर गहराई में है। गर्भगृह में सिंदुर से पूती हुई प्रतिमा स्थापित है जिसे स्थानीय लोग धुमेश्वरी देवी के नाम से पूजा करते है।

मंदिर का शिखर धवस्त हो गया है। मंदिर के बाहरी दिवारों पर बने आलिंदों में देवी देवताओं की बहुत सी प्रतिमायें स्थापित है। चतुर्भूजी गणेश, इंद्र, अग्नि, यम, वरूण, शिव, द्विभूजी सूर्य अपने दोनो हाथ में कमल लिये, दस भुजाओं वाली चामुंडा, हरिहरहिरण्यगर्भ, महिषासुरमर्दिनी आदि देवी देवताओं की प्रतिमायें स्थापित है। इसके अतिरिक्त कुछ मिथुन प्रतिमायें भी जड़ी हुई है।

नृत्यरत अप्सरायें, योगी, ढोलवादक, ऋषि आदि की भी प्रतिमायें मंदिरों की दिवारों पर लगी हुई है। मंदिर के द्वारशाखा के दोनो तरफ गंगा यमुना एवं शैव द्वारपालों की प्रतिमायें स्थापित है।

द्वारशाखा के ललाट बिंब में चतुर्भूजी शिव अंकित है। दायें तरफ ब्रम्हा और बांये तरफ विष्णु का अंकन किया गया है। बीच में नवग्रहों का भी अंकन किया गया है। मंदिर सुरक्षित अवस्था में है। मंदिर का निर्माण काल इतिहासकारों ने तेरहवी सदी माना है।

मेरी इस मंदिर को देखने की बड़ी इच्छा थी सो पिछले वर्ष हमने पुरी कर ली। आप भी इस मंदिर को देखने जा सकते है। रायपुर से बिलासपुर मार्ग में 87 किलोमीटर की दुरी पर सरगांव नाम के छोटे से ग्राम में यह मंदिर स्थित है। कभी मदकूद्वीप या ताला जाये तो आप यह मंदिर भी देख सकते है। 
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