कोटड़ा का किला — एक गुमनाम धरोहर
राजस्थान के बाड़मेर जिले में शिव तहसील के अंतर्गत कोटड़ा गांव है। इस गांव की एक छोटी सी पहाड़ी पर पुरी तरह से जीर्ण शीर्ण किला अवस्थित है। एक समय उत्तरी सीमा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा यह किला अब अपना अस्तित्व खो चुका है। किले के बुर्ज और चार दिवारी और अंदर के इमारत पूरी तरह से बिखर कर पत्थरों के ढेर में तब्दील हो चुका है।
वास्तु कला के नाम पर एक सुंदर झरोखा ही किले का पहचान बना हुआ है जिसे मेडी कहा जाता है।किले के मध्य में एक प्राचीन मंदिर भी है जो कि अलग थलग सा है। मंदिर के शिखर पर कुछ नए मंदिर बना दिए गए हैं। जहां कोटड़े के निवासी समय समय पर पूजा अर्चना के लिए आते हैं। किले की एक चौकी में वीर प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। किले के शिखर से आसपास का नजारा देखने लायक है।
यह किला बाड़मेर, और जैसलमेर के सोनार किले के समकालीन निर्मित है। वहां के लोगों का मानना है कि यह उनसे भी पूर्व निर्मित है।यह किला राठौड़ राजपूतो के अधीन रहा है।
सामरिक एवम ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह किला गुमनामी में नष्ट होता जा रहा है। इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की दिशा में सिर्फ उदासीनता नजर आती हैं क्योंकि ना ही इस किले की कोई जानकारी उपलब्ध है और ना ही यहां जाने का पहुंच मार्ग और सूचना पट्ट है। यह वहां बाड़मेर के पर्यटन नक्शे में भी शामिल नही है।
ओम प्रकाश सोनी
असिस्टेंट प्रोफेसर सुकमा



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