Wednesday, 25 June 2025

मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर

पूरे भारत में कोणार्क के सूर्य मंदिर के बाद मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर गुजरात राज्य के मेहसाणा जिले में मोढ़ेरा गांव में पुष्पावती नदी की सहायक रुपेन नदी के तट पर निर्मित है। यह मंदिर अपने स्थापत्य और सूर्य मंदिर के तौर पर भारत के स्थापत्य कला में विशिष्ट स्थान रखता है। यह देवालय गुजरात में उस दौर का भी साक्षी है जब महमूद गजनवी के आक्रमणों ने सोमनाथ को नष्ट किया था। 

चालुक्य राजाओं ने बड़ी सूझ बूझ से आक्रांताओं से बचाते हुए इस देवालय का निर्माण कराया। इस मंदिर के साथ चालुक्य राजा भीमदेव सोलंकी का नाम जुड़ता है। इस मंदिर की पिछली दीवार पर विक्रम संवत् 1083 अंकित है जो कि ईस्वी सन 1026 ठहराता है, इस आधार पर इसे भीमदेव सोलंकी के काल में निर्मित माना गया है। 

मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर कई चरणों में निर्मित हुआ है। यह मंदिर प्रदक्षिणायुक्त गर्भगृह, गूढ़ मंडप, तोरण द्वारों से युक्त सभामंडप, एक विशाल आयताकार कुंड इस प्रकार के घटकों से यह संपूर्ण देवालय निर्मित है। वर्तमान में गर्भगृह शिखर विहीन है। गर्भगृह में कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है। मंदिर के बाहर सूर्य की बारह प्रतिमाएं, बारह गौरी प्रतिमाएं, विष्णु, शिव, भैरव, कार्तिकेय, अप्सराएं, रामायण महाभारत के दृश्य और तत्कालीन सामाजिक जीवन का शिल्पांकन मिलता है। 

सूर्य की प्रतिमाएं आदमकद है। मंदिर के प्रवेश द्वार अत्यंत कलात्मक और आकर्षक है। चालुक्यों की कला शैली स्वर्ण से भी महंगी रही है। पत्थरों पर इतनी बारीकी से खुदाई कार्य उत्तर भारत के चालुक्य राजाओं के मंदिरों में दिखलाई पड़ती है। 

इस मंदिर के सामने एक विशाल आयताकार कुंड है जिसे रामकुंड कहा जाता है। इस कुंड में छोटे बड़े 108 मंदिर और देव कुलिकाएं बनी हुई है। इन मंदिरों में विष्णु, शीतला माता, नटराज आदि की प्रतिमाएं स्थापित है। यह मंदिर गुजरात के सुरक्षित बचे मंदिरों में सर्वाधिक दर्शनीय है। 


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