जैसलमेर में श्री राम की दुर्लभ प्रतिमा
जैसलमेर दुर्ग संग्रहालय के मूर्ति कक्ष में भगवन श्री राम की बेहद ही दुर्लभ और विस्मयकारी प्रतिमा रखी हुई है। भगवान श्री राम की यह प्रतिमा पूरे विश्व में सबसे अलग है क्योंकि इस प्रतिमा में श्री राम को दाढ़ी मूंछ में प्रदर्शित किया गया है। श्री राम का ऐसा स्वरूप किसी भी अन्य प्रतिमा या चित्र मे देखने को नहीं मिलता है।
श्री राम की छवि जनमानस में किसी नवयुवक सुकुमार की रची बसी है। बड़ी सी दाढ़ी और मूंछो से सुशोभित श्री राम की यह छवि बेहद ही कौतूहल उत्पन्न करती है। मूर्तिकार के द्वारा प्रतिमा में श्री राम को इस छवि में प्रदर्शित करने का उद्देश्य मुझे यह जान पड़ता है कि श्री राम जब सीता की खोज में थे तब उस समय सीता को पाने के लिए उनकी स्थिति इस तरह सी हो गई थी और दूसरा कारण यह हो सकता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को तत्कालीन राजपूत राजाओ का स्वरूप दिया गया इसीलिए उन्हें दाढ़ी मूंछ में दिखाया गया।
जैसलमेर के जिला संग्रहालय में भी भगवान श्री राम की ऐसी ही एक और प्रतिमा रखी हुई है जिसमें भी राम को दाढ़ी मूछ में दिखाया गया, काले प्रस्तर की वह प्रतिमा खंडित है। इस प्रकार श्री राम की दोनो प्रतिमा बेहद ही आकर्षक और दुर्लभ है। इस प्रतिमा का निर्माण काल पंद्रहवीं सदी है।
श्री राम की यह प्रतिमा मंदिर के शिल्पियों ने जैसलमेर के महारावल को भेंट की थी क्योंकि जैसलमेर में जब भी किसी नये मंदिर का निर्माण किया जाता था तो महारावल को एक उत्कृष्ट प्रतिमा शिल्पियों द्वारा भेंट दी जाती थी।
ओम प्रकाश सोनी
असिस्टेंट प्रोफेसर सुकमा


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