Sunday, 31 December 2023

कलात्मक छतरियों का संग्रहालय — जैसलमेर का बड़ा बाग

कलात्मक छतरियों का संग्रहालय — जैसलमेर का बड़ा बाग

जैसलमेर पर राज करने वाले महारावलों ने अपने जीवन काल में भव्य सोनार किले का निर्माण बहुत ही उत्तम कारीगरी से करवाया और आज जैसलमेर वास्तुकला एक विचित्र भंडार बन गया है। महारावलो ने अपने स्वर्णिम इतिहास को मृत्यु उपरांत भी छतरियों में संजो रखा है यह एक अद्भुत उपलब्धि है।

जैसलमेर से कुछ दूरी पर स्थित बड़ा बाग एक बेहद ही खूबसूरत एतिहासिक स्मारक है। पहाड़ी पर बने ये सुनहरे स्मारक बेहद ही आकर्षक है। जैसलमेर राजपरिवार की समाधियों का अजायबघर बड़ा बाग एक खुबसूरत शमशान स्थल है। छतरियों में लगे पीले पत्थरो की अद्भुत नक्काशियो को देखकर पर्यटक अचरज से भर जाता है कि शमशान भी भला क्या इतना खूबसूरत हो सकता है।

बड़ा बाग में छोटी मोटी कुल 107 छतरियां है। 1528 में जैसलमेर के 18 वे महारावल जैतसिंह द्वारा दो पहाड़ों के बीच एक बांध बनवा रहे तब उनका देहांत हो गया। इनके पुत्र महारावल लूणकरण ने अपने पिता का उसी पहाड़ी पर अंतिम संस्कार कर छतरी बनवाई और उसमे उनकी मूर्ति स्थापित कर दी। जैतबंध का निर्माण भी पुरा कराया गया। वह बांध आज पर्यंत मौजूद हैं। जैसलमेर के महारावल जैतसिंह की छतरी 1528 ईस्वी में पहली बार जिस पहाड़ी पर बनी थीं तब से लेकर आज पर्यंत तक जैसलमेर के राजपरिवार के सदस्यों का अंतिम संस्कार यहीं होता आया है। 

ये छतरियां पैगोड़ा शैली और मुगल शैली में बनी है। पत्थरों पर बारीक खुदाई और कलाकृतियां इन छतरियो को वास्तुकला का शानदार उदाहरण बनाती है। बड़ा बाग की छतरियां किसी भी मुगल मकबरे से कहीं अधिक आकर्षक है। छतरियों के गुम्बद, उसमे लगी प्राचीन प्रतिमाएं, पत्थरो की बारीक जालियां बड़ा बाग को वास्तुकला का संग्रहालय निरूपित करती है।

बड़ा बाग की छतरियां जैसलमेर आए प्रत्येक पर्यटक के लिए सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र है। आप जैसलमेर आएं और बड़ा बाग की छतरियों को ना देखे तो आपकी जैसलमेर यात्रा अधूरी ही समझो।

ओम प्रकाश सोनी

असिस्टेंट प्रोफेसर सुकमा 

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