Sunday, 10 February 2019

भोजशाला की मां वाग्देवी

भोजशाला की मां वाग्देवी ....!

राजा भोज अपने समय के महाप्रतापी व बेहद लोकप्रिय राजा थे. भारत के इतिहास मे विद्वान राजाओ मे राजा भोज का नाम बेहद ही सम्मान से लिया जाता है. इतिहासकारो ने राजा भोज का कार्यकाल 1010 ईस्वी से 1055 ईस्वी अनुमानित किया है. छियालिस साल के शासन अवधि मे राजा भोज ने मालवा को मध्य भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य बना दिया. राजधानी धारा को मध्य भारत का सुप्रसिद्ध शिक्षा एवं कला का केन्द्र बनाने मे राजा भोज का अमूल्य योगदान था.
भोज ने धारा मे सरस्वती कंठाभरण या भोजशाला नामक संस्कृत विद्यालय की स्थापना की. उसने महान मूर्तिकार मंथन की सहायता से भूरे रंग के स्फटिक पत्थर से वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा का निर्माण करवाया तथा 1034 ईस्वी मे इस प्रतिमा की मन्दिर मे स्थापना करवाई. भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार का प्रतीक चिन्ह वाग्देवी प्रतिमा इसी की प्रतिकृति है. भोज का सरस्वती कंठाभरण काव्य वाग्देवी के स्तुति से ही प्रारंभ होता है.( संदर्भ - प्राचीन भारत नवीन सर्वेक्षण - पप्पू सिंह प्रजापत जी)
वाग्देवी की यह प्रतिमा वर्तमान मे लंदन के संग्रहालय में रखी हुई है.वाग्देवी की यह प्रतिमा बेहद भव्य है. प्रतिमा शिल्प के गुणों के आधार पर देवी की यह प्रतिमा बेहद ही विशेष एवं दुर्लभ है.

इस प्रतिमा मे तत्कालीन भारत के विभिन्न शैलियों का अद्भुत संयोजन देखने को मिलता हैं.विश्वेश्वरनाथ जी अपनी कृति राजा भोज मे इस प्रतिमा से जुड़ी बेहद मह्त्वपूर्ण जानकारी साझा करते है. उनके मुताबिक 1924 मे कलकत्ता से प्रकाशित रुपम मे उक्त प्रतिमा का चित्र और उसके सम्बन्ध मे एक लेख प्रकाशित हुआ है.
उसमे लिखा है कि इस मूर्ति के कुछ आभूषण जैसे मुकूट आदि चोल मूर्तियो के आभूषणो से मिलते हैं. इसी प्रकार भूजाओ के आभूषण पुरानी पाल मूर्तियो और उड़ीसा के मूर्तियो से मिलते हैं. यह मूर्ति एलोरा के शिल्पकला के आधार पर ही बनी प्रतीत होती है. इसके पैरो के नीचे खुदा हुआ लेख इस प्रकार पढा गया है - श्रीमध्दोर्जनरेन्द्रचन्द्रनगरी विध्या (द्या) धरीमो (मा) न घि: (घी:) नमस (नामस्या) स्म.... खलुसुखं प्रप्यन (प्राप्यानया) याप्सरा:
वाग्देवीप्रतिमां विधाय जननीं यस्यार्ज्जितानाम त्रयी...... फ़लाधिकां घरसरिन्मूति शुभां निम्मर्मे.
इति शुभम. सुत्रधार सहिर सुत मनथलेन घटितम. वि... टिक सिवदेवेन लिखितं. इति सम्वत 1061( इस्वी 1035)

आलेख - ओम सोनी दन्तेवाडा
छायाचित्र नेट से ली गयी है.

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