Sunday, 3 February 2019

एक नगर जहां सिर्फ आनंद ही आनंद

आनंद की नगरी - मांडू.....!

मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित मांडू भारत के पर्यटन मानचित्र में बेहद विशिष्ट स्थान रखता है। मांडू का स्थान भारतीय इतिहास एवं संस्कृति में भी महत्वपूर्ण है। बेहद शांत वातावरण और अपने लूभावने प्राकृतिक दृश्यों के कारण मांडू देश के पर्यटन स्थलों में बेहद ही शानदार नगीना है। मांडू का प्राकृतिक सौंदर्य मन को सुकून देता है। बारिश के दिनों में चारों तरफ फैली हरियाली के कारण मांडू के दृश्य बड़े ही मनोरम हो जाते है। 
बेहद मनमोहक दृश्य

उस वक्त धरती का हरा श्रृंगार काफी लूभावना हो जाता है। प्राकृतिक दृश्यों से परिपूर्ण होने के साथ-साथ मांडू पुरातात्विक रूप से भी बेहद संपन्न है। विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में दो हजार फीट की उंचाई पर बसा मांडू प्रकृति के मनमोहक दृश्यों को अपने आंचल में समेटे हुये है। प्राकृतिक रूप से सुरक्षित दुर्ग होने के कारण प्राचीन काल में मांडू परमार राजाओं का दुर्ग राजधानी था।
होशंगशाह का मकबरा

मध्यकालीन इतिहास की साक्षी स्मारको के कारण मांडू देशी विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर काफी आकर्षित करता है। शीतकाल के दिनो में चहूं ओर फैली नीलिमा में मांडू के ऐतिहासिक ईमारते किसी रत्न से कम नहीं लगती है। मांडू पर कई शासकों ने शासन किया और अपने कार्यकाल में कई भव्य स्मारक बनवाये। 
नीलकंठ की ओर जाते हुये बाजबहादुर

मांडू में आज भी ये स्मारक उन शासकों के शासन की मूक गवाह है। मांडू का प्रत्येक स्मारक वास्तुकला की दृष्टि से एक रत्न के समान है। मांडू का पूरा परिवेश ही आनंद एवं उल्लास से परिपूर्ण है। यहां के प्राकृतिक एवं पुरातात्विक सौंदर्य को देखने के बाद मन को असीम आनंद की प्राप्ति होती है। शायद इसी कारण मांडू को आनंद की नगरी की उपमा दी गई है।
मांडू का अप्रतिम सौंदर्य

यहां के हर पत्थर में बाज बहादुर और रानी रूपमती के अमर प्रेमगाथा के निशान मौजूद है। यहां के हर निवासी को दोनों के प्रेम कहानी से जुड़ी कई बाते सदियों से ज्ञात है।
 ऐतिहासिक इमारतों में जहाज महल और हिंडोला महल तो पुरे विश्व में मांडू के पर्याय बन चुके है। होशंगशाह का मकबरा अपने समय का सबसे पहला पूर्ण संगमरमर से बना हुआ मकबरा है। नीले आकाश में यह हीरे की तरह चमकता प्रतीत होता है। 
रूपमती को तलाशते हुये

बाज बहादुर और रानी रूपमती के महल आज भी बाज बहादुर और रानी रूपमती की अमर प्रेम गाथा का मधुर संगीत सुनाते है। अशर्फी महल और नीलकंठ महल मुगलकालीन स्थापत्य की झलक को दिखलाते है। 
मांडू के मध्य बना भगवान राम का मंदिर मराठा कालीन स्थापत्य कला का परिचय देता हुआ भक्ति का संदेश देता है। मांडू के मूंज तालाब परमार कालीन जल प्रणाली का उत्तम उदाहरण है। रेवाकुण्ड में मां नर्मदा की जल की पवित्रता आज भी वैसी ही है।
नीलकंठ की ओर जाते हुये बाजबहादुर


आनंद की नगरी मांडू में चहूं ओर आनंद ही आनंद है। यहां आने के बाद मांडू से विदा लेने की इच्छा ही नहीं होती है। यहां की शांति और लूभावने दृश्य हर किसी का दिल जीत लेते है, अपना बना लेते है। ऐसा लगता है जैसे मांडू से जनमों जनम का कोई रिश्ता हो। सच में आनंद की नगरी है मांडू।
OM PRAKASH SONI
DANTEWADA CG

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