जहाज सा है यह महल - जहाज महल मांडू.....!
जहाज महल आज मांडू का पर्याय बन चुका है। पहली बार जहाज महल का नाम सुनने पर लगता है कि जरूर जहाज के जैसे दिखने वाला कोई महल होगा। वास्तव में यह जहाज की तरह तो नहीं दिखता है परन्तु जहाज की तरह दो तालाबों के मध्य खड़ा दिखाई देता हैं।
मांडू का जहाज महल मध्यकालीन प्रान्तीय स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है। यह दो मंजिला इमारत लगभग 121 मीटर लंबी और लगभग 16 मीटर चैड़ी है। महल पर चढ़ने के लिये सीढ़ियां ऐसी बनाई गई है जैसे किसी जहाज पर चढ़ने के लिये बनायी जाती हैं।
इस महल के पीछे विशाल मूंज तालाब है तो आगे की और कपूर तालाब है। बरसात के दिनों में पानी से लबालब भरे इन तालाबों के मध्य यह जहाज महल समंदर में लंगर डालकर ठहरा हुआ प्रतीत होता है। छत पर गोल गुंबद वाले मंडप बने हुये है। साथ ही कमल की आकृति में कुंड बना हुआ हेै। सुल्तान गयासुददीन खिलजी ने (1469 ई-1500 ई) ने कराया था। कहते है कि ग्यासुददीन खिलजी के हरम में 15 हजार से भी अधिक स्त्रियां थी। यह महल भी उसने अपने हरम के लिये ही बनाया था।
लाल पत्थरों से निर्मित इस महल को और भी भव्य रूप देने में अन्य शासकों का भी योगदान रहा है। मुगल शैली में बने हुये झरोखे और गुंबद जहाज महल को भव्य रूप देते है। जहाज महल के उपरी भाग से कपूर तालाब और मंूज तालाब के मनमोहक दृश्य दिखाई देते है। सामने लगे बगीचे के फूलों ने जहाज महल की सुंदरता में चार चांद लगा दिये है।
मुगल सम्राट जहांगीर ने जहाज महल की प्रमोद रात्रि का विस्तृत वर्णन करते हुये लिखा है कि मालवे की शीतल निशाओं में जगमगाते हुये दीपों से ज्योतिज और दिव्य वस्त्र आभूषणों से अलंकृत सुंदरियों तथा सुंदर दरबारियों से युक्त जहाज महल के सभा भवन की कल्पना कोई भी सहज कर सकता है। यह सब उस समय की सर्वश्रेष्ठ संुदरी नूरजहां के वैभव के अनुकूल ही था। (संदर्भ मांडू आर्कियोलाजी सर्वे आफ इंडिया)
अब यह महल निर्जन है किन्तु जब यहां कोई पर्यटक इस महल का अवलोकन करता है तो वह भी उन कल्पनाओं मे खुद को खोने से नहीं रोक पाता है।
OM PRAKASH SONI
DANTEWADA









No comments:
Post a Comment