Monday, 11 February 2019

श्री कलिका प्रसन्ना भवदा वरदात

धार की गढ़कालिका माता जी......!

धार नगर में मूंज सागर के पास स्थित एक छोटी सी पहाड़ी पर कालिका माता जी का प्राचीन मंदिर स्थित है। यहां के स्थानीय लोग देवी को गढ़कालिका माता के नाम से पूजते है। यह देवी धार के रियासत कालीन पवार राजाओं की कुल देवी है। यह प्राचीन होने के साथ-साथ आस्था का केंद्र है। कई लोग देशभर से अपनी मन्नतें पूरी होने के बाद माता जी के दर्शनों के लिए यहां आते है।
श्री कलिका प्रसन्ना भवदा वरदात

धार की देवीजीके प्रति लोगों की गहरी आस्था है। अन्य प्रांतो से भी यहां लोग मन्नत मांगने आते है। यहां प्रचलित मान्यतानुसार श्रद्धालु यहां उल्टा स्वस्तिक बनाकर यहां जाते है और मन्नत पूरी होने पर सीधा स्वस्तिक बनाते है। साथ ही अपनी मान्यतानुसार चढ़ावा भी अर्पित करते हैं। कई लोग अपनी कुलदेवी के रूप में इनका पूजन करते हैं। 

मंदिर तक जाने के लिये पक्की सीढ़ियां बनी हुई है। गर्भगृह में देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर बहुत प्राचीन है। परवर्ती काल में इसका जीर्णोद्धार किया गया है।  मंदिर को लोग देवी का शक्तिपीठ भी मानते है। 
श्री कलिकादेवी

मंदिर गर्भगृह, अंतराल और मंडप में विभक्त है। बाहरी दिवारें बेहद ही सादी है।  गर्भगृह से जलनिकासी के लिये मकरमुख प्रणालिका बनी हुई है। मंदिर के बाहर दीपमालिका स्थापित है। 
 प्राचीन मंदिर

नवरात्र के समय यहां पर भक्तों की काफी भीड़ रहती है। मंदिर परिसर में बाहर की तरफ कई दुकाने सजी हुई है। आसपास का माहौल भी बेहद ही शांत एवं भक्तिमय है। सामने मुंज सागर  में आज भी परमार युगीन इतिहास की झलक दिखलाई पड़ती है। 

उंची पहाड़ी पर होने के कारण धार नगर की मनमोहक खुबसूरती स्वागत करती हुई दिखलाई पड़ती है। यहां से धार के माहौल में  परमार ,और मराठा शासकों के शासन काल की महक महसूस की जा सकती है। 
अन्य पहाड़ी पह स्थापित मंदिर

मन्नत पुरी होने पर लोग यहां पर बकरे की बलि भी चढ़ाते है। गाजे बाजे के साथ यहां पर कुछ लोग बकरों को मंदिर में ले जा रहे थे। यह नजारा मेरे सामने ही घटित हुआ है। गढ़कालिका माता जी का मंदिर धार के प्रमुख मंदिरो मे से एक है। यहां दर्शन करने से सारे बिगड़े काम बन जाते है।
धार नगर का मनमोहक दृश्य

ऐतिहासिक मुंज सागर

गाजे बाजे के साथ बकरों को बलि के लिये लाते हुये श्रद्धालु

108 दीपों की प्राचीन दीपमालिका

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