Monday, 1 January 2024

विराने की विरासत देवका का प्राचीन सूर्य मंदिर

विराने की विरासत देवका का प्राचीन सूर्य मंदिर

आज सूर्य मंदिर कोणार्क ओडिसा और सूर्य मंदिर मोढ़ेरा गुजरात जग प्रसिद्ध है, जहां पर्यटकों एवम श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।कुछ सूर्य मंदिर ऐसे भी हैं जो आज वीराने से है और ना ही आम जनों को उसकी जानकारी है, ऐसा ही एक सूर्य मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले में है जहां एक समय में भक्तों की भीड़ लगी रहती थी, किंतु आज गुमनाम है।

जैसलमेर से बाड़मेर जाने वाले रास्ते में गूंगा गांव से 12 किलोमीटर एवम शिव गांव के नजदीक ही देवका है, जहां देवका का प्राचीन सूर्य मंदिर है। वर्तमान में शेष ये दो मंदिर मुख्य सड़क से दिखलाई पड़ते है किन्तु मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुंचने का रास्ता कच्चा और घुमावदार है। ये मंदिर ऊंचे पठार पर है जिसके कारण आसपास के प्राकृतिक परिवेश में इनकी सुंदरता देखते ही बनती है।

एक मजबूत चार दिवारी से सुरक्षित प्रांगण में वर्तमान में दो मंदिर अवस्थित है। मुख्य विशाल मंदिर सूर्य को समर्पित है। जो की ऊंची जगती पर बना है। यह मंदिर पंचायतन शैली में निर्मित है जिसके चार कोने में छोटे मंदिर रहे हैं जो की नष्ट हो चुके हैं। मुख्य मंदिर गर्भगृह अंतराल और मंडप में विभक्त है। इसके मंडप को जीर्णोद्धार कर नवीन स्वरूप दिया गया है। मंडप के स्तम्भ सादे है। गर्भगृह के ललाट बिंब पर सूर्य की प्रतिमा उत्कीर्ण है जो इस मंदिर के सूर्य मंदिर होने का प्रमाण है। गर्भगृह वर्तमान में प्रतिमा विहीन है।

सूर्य मंदिर के सामने एक छोटा शिव मंदिर है जिसका प्रवेशद्वार काफी अलंकृत है। जिसमे ऊपर नवग्रहों का अंकन है और नीचे कुबेर और गणेश की प्रतिमा अंकित है।सूर्य मंदिर में सोलहवीं सदी के कुछ अस्पष्ट अभिलेख भी है। सूर्य मंदिर बारहवीं तेरहवीं सदी में निर्मित अनुमानित है।

सूर्योदय के समय इन मंदिरों का अवलोकन सबसे श्रेयसकर है। उदय होते सूर्य की किरणों के साथ मंदिरों के दर्शन और खूबसूरत प्राकृतिक भू दृश्यावली मन को आनंद से भाव विभोर कर देती है।


ओम प्रकाश सोनी

असिस्टेंट प्रोफेसर सुकमा 

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