चित्तौड़गढ़ के जैन कीर्ति स्तंभ और मंदिर
चितौड़गढ़ दुर्ग में कीर्ति स्तंभ सहित एक प्राचीन जैन मंदिर मुख्य आकर्षण का केंद्र है। अद्भुत नाथ मंदिर से कुछ पास ही यह ऐतिहासिक महत्व के देवालय और स्तंभ मौजूद है। जैन कीर्ति स्तंभ के समीप 896 ईस्वी का एक लेख कर्नल टाड को मिला था जिसमे आदिनाथ , जिनेश्वर, पुंडरीकक्ष, सूर्य, गणेश का उल्लेख है। यह लेख अब उपलब्ध नहीं है।
इस लेख का कीर्तिस्तंभ से क्या संबंध है? क्या यह इसके निर्माण की तिथि है? कहा नहीं जा सकता है। आधुनिक विद्वानों की मान्यता है कि यह विक्रम संवत 1100 के आसपास बना था।
इसके निर्माता का नाम नय पुत्र श्रेष्ठि जीजा था, जो बघेरवाल था। इससे सम्बन्धित दो लेख भी मिले हैं। इसी जीजा श्रेष्ठि के वंशजों के नंदगांव में एक मूर्ति प्रतिष्ठापित कराई थी, इसमें प्रसंगवश चितौड़ के कीर्ति स्तंभ स्थापित कराने का श्रेय जीजा श्रेष्ठि को दिया है इसके पिता का नाम श्रेष्ठि नय था।
एक ऊंची जगती पर बना जैन कीर्ति स्तंभ 76 फीट ऊंचा है। यह कई अलंकृत प्रतिमाओं से सज्जित है। इसके नरथर में युद्ध, पूजा, शिकार आदि के दृश्य अंकित किए गए हैं।स्तंभ के मध्य में चार कायोत्सर्ग प्रतिमाएं बनी हुई है।
जैन कीर्ति स्तंभ के समीप महावीर जैन मंदिर बना हुआ है। यह प्रारंभ में दिगंबर मंदिर रहा होगा, क्योंकि इसके पास ही दिगंबर जैन कीर्तिस्तंभ बना हुआ है। मंदिर अलाउद्दीन ख़िलजी के आक्रमण के समय खण्डित हो गया था जिसका जीर्णोद्धार गुणराज श्रेष्ठि के पुत्रों ने किया था। यह जीर्णोद्धार विस 1485 से प्रारंभ होकर 1495 विस में पूर्ण किया था। इसकी प्रतिष्ठा आचार्य सोम सुंदर सूरी ने की थी।
मंदिर पश्चिमाभिमुख है इसमें गर्भगृह और मंडप है। इसका शिखर खंडित हो गया था जिसका पूर्व में जीर्णोद्धार कराया गया है। मंदिर की भित्तियो पर उमा महेश्वर, ब्रम्हा सावित्री, भैरव, सूर्य और अप्सरा आदि की प्रतिमाएं जड़ी हुई है।
संदर्भ पुस्तक चितौड़गढ़ का इतिहास आदरणीय डॉ श्री कृष्ण जुगनू सर
ओम प्रकाश सोनी




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