एरन की महाविष्णु प्रतिमा
एरन मुख्यतौर पर गुप्तकालीन ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां स्थित महाविष्णु की प्रतिमा पूरे विश्व में एरन की पहचान बन चुकी है। विष्णु की यह प्रतिमा आकार में विशाल एवं भव्यता लिए हुए हैं।
पीछे की तरफ झुकी हुई यह मूर्ति लगभग 16 फिट की ऊंचाई लिए हुए हैं। विष्णु मूर्ति मूल रूप से जहां स्थापित है वहां एक बड़ा मंदिर हुआ करता था किंतु वर्तमान में मंदिर की द्वार शाखा और अर्धमंडप मात्र ही शेष रह गया है।
चतुर्भुजी विष्णु की यह प्रतिमा खंडित हो चुकी है जिसके कारण इसके आयुध स्पष्ट नहीं है फिर भी अन्य विष्णु प्रतिमाओं की तरह यह भी शंख चक्र गदा से सुशोभित रही होगी।प्रतिमा में नीचे दोनो तरफ गदा का अंकन है किंतु वे धारित नही है।
शीश पर मुकुट पहने हुए हैं जिसमे सिंह का मुख बना हुआ है। मुखमंडल में पीछे गोलाकार प्रभामंडल निर्मित किया गया है। गले में हार पहने और हाथो में बाजूबंद से शोभित है।
अधोवस्त्र के रूप में धोती का अंकन है।पूरी प्रतिमा एक चौकोर योनिपट्ट पर स्थापित है।मंदिर की द्वार शाखा के ललाट बिंब पर गरुडवाही विष्णु अंकित है। इसके अतिरिक्त गंगा यमुना , कीर्तिमुख, नाग आदि का खूबसूरत अंकन है।
इस मंदिर से 1874 में कनिंघम को समुद्रगुप्त का लेख मिला था। जिसके अनुसार समुद्रगुप्त अपने पत्नी, बेटो और पौत्रों सहित एरिकिन में आमोद प्रमोद के लिए प्रवास किया था। कनिंघम के अनुसार यह लेख इसी महाविष्णु मंदिर से संबंधित था। इसलिए यह अनुमान किया गया कि यह मंदिर गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त के द्वारा या उसके आसपास ( चौथी पांचवी सदी)में निर्मित किया गया था।
एरन मध्यप्रदेश के सागर जिले में है।मंडी बामोरा या बीना से यहां पहुंचा जा सकता है
ओम प्रकाश सोनी
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पूर्व काल में महाकाय प्रतिमाएं बनाई गईं... यह माना गया था कि ईश्वर और उसके अवतार के विभव बड़े, विराट और महान होते ... यक्ष की मान्यताओं में इसके विकास का सूत्र निहित है। समरांगन सूत्रधार में खुले आंगन में स्थापना के योग्य मूर्तियों का विस्तृत विमर्श आया है। ऐसा भी होता था कि मंडप दर्शकों के लिए और मुक्ताकाशी स्थिति में मूर्ति होती... शिवलिंग, कार्तिकेय, गण, गणपति भी विशाल बनाए गए। ऐरन से लेकर उदयगिरि तक वराह की विशाल मूर्तियों का रहस्य हमें वास्तुशास्त्र में मूर्तियों के अनेक रूपों के अध्ययन के लिए प्रेरित करता है।
🌻🌸 टिप्पणी साभार Shri Krishan Jugnu सर 🙏





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