मीरा मंदिर (मूल कुम्भश्याम मंदिर) चितौड़गढ़
चितौड़ गढ़ के कुंभस्वामी मंदिर परिसर में एक अन्य लघु वराह मंदिर है जिसे अब मीरा मंदिर कहा जाता है। मीराबाई भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थी। ऐसा शायद ही कोई श्रद्धालू होगा, जो इनके नाम से परिचित ना हो। श्री कृष्ण की परम भक्त मीरा के भजन जन सामान्य में काफी लोक प्रिय है।
मीरा बाई का मंदिर मूल रूप से महाराणा कुम्भा द्वारा निर्मित है। राजस्थान में वैष्णव मंदिरों को मीरा मंदिर कहने की परम्परा है। वर्तमान में इस मंदिर में श्री कृष्ण और उसकी भक्त मीरा की संगमरमर से बनी नवीन प्रतिमाएं स्थापित है। मंदिर के सामने एक छतरी है जिसमे मीरा के गुरु रविदास के चरण चिन्हों के प्रतीक बने हुए हैं।
आदरणीय श्री कृष्ण जुगनू सर के अनुसार मूलत: कुम्भश्याम मंदिर वराह मंदिर था तथा बाजू का वर्तमान मीरा मंदिर मूल कुम्भश्याम मंदिर था।बाद के वर्षों में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमणों में वराह मंदिर के क्षतिग्रस्त होने के कारण वराह मंदिर कुम्भश्याम मंदिर के नाम से जाना जाने लगा।
मूल कुम्भश्याम मंदिर महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज की धर्मपत्नी मीराबाई द्वारा पूजा अर्चना करने के कारण मीरा मंदिर के नाम से संबोधित किया जाने लगा ।
ओम प्रकाश सोनी



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