भारतीय मूर्तिशिल्प और स्थापत्य का आदर्श जगत अंबिका मंदिर
राजस्थान के उदयपुर जिले के जगत गांव में देवी अंबिका का प्राचीन मंदिर अवस्थित है। संगमरमर की दूधिया पत्थरों से बना हुआ यह देवालय नागर शैली में निर्मित है। यह गर्भगृह, अंतराल मंडप और सभा मंडप की वास्तु योजना में निर्मित है। शिखर उरू श्रृंगो से सुशोभित है। शिखर आमलक कलश युक्त ध्वजाएं स्थापित है।गर्भगृह में देवी अंबा की भव्य प्रतिमा प्रतिष्ठापित रही जो कुछ साल पूर्व ही चोरी हो चली।
वर्तमान में देवी की नवीन प्रतिमा स्थापित की गई है।मण्डप में भगवान् गणेश की नृत्य मुद्रा की दुर्लभ प्रतिमा संरक्षित रखी हुई है। गर्भगृह का प्रवेशद्वार के ललाट बिंब पर गणेश प्रतिमा उकेरी हुई है। द्वार को विभिन्न देवी देवताओं, गंगा यमुना, द्वारपाल, मिथुन युगल, आदि की प्रतिमाओं से अलंकृत किया गया है।
मंदिर के मंडोवर देवी देवताओं, मिथुन युगल, अप्सराओं, व्याल, की दुर्लभ प्रतिमाओं का अनुपम संग्रह है। देवी प्रतिमाओं में महिषासुर मर्दिनी स्वरूप की कई प्रतिमाएं स्थापित है। एक प्रतिमा शुम्भ हंत्री अंबिका की है जो अपने आप में भारतीय मूर्तिशिल्प की सबसे अनोखी प्रतिमा है, ऐसी प्रतिमा आजतक देखने को नहीं मिली। अष्ट दिकपाल में छह दिकपाल की मूर्तियां भी स्थापित की गई है।
इसके अतिरिक्त दूधिया सफेद पत्थरों से बनी हुई नायिकाओं की मूर्तियां आकर्षण का केंद्र है। संगीत मंडलिया, जन सामान्य के दृश्य और प्रेमी युगल की असंख्य प्रतिमाएं विभिन्न भाव भंगिमाओ को प्रदर्शित करती हुई शोभित है।मंदिर से जल निकासी की प्रणालिका में देवी कलश धारण किए हुए निर्मित है। यह प्रणालिक पास के अन्य छोटे देवालय से जुड़ी हुई हैं।
यह पूरा मंदिर एक परकोटे से सुरक्षित है जिसके कारण यह मुख्य सड़क से काफी नीचे है। परकोटे का मुख्य प्रवेशद्वार बेहद ही कलात्मक है। इस पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां भी बनी हुई है। अम्बिका मंदिर के अतिरिक्त एक दो अन्य लघु मंदिर भी है। जिसमें एक मंदिर गुप्तकालीन हैं जो कि ध्वस्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
इस मंदिर में मेवाड के गुहिल वंशी राजा अल्लट का 960 ईस्वी का लेख मंदिर के जीर्णोद्धार हेतू प्राप्त हुआ है। मेवाड के ही एक जागीरदार सामंत सिंह का भी लेख मंदिर में खुदा हुआ है जिसमे विक्रम संवत 1228 में स्वर्ण कलश दान किया था।
यह मंदिर भारतीय स्थापत्य कला में दसवीं सदी से पूर्व निर्मित सभी मंदिरों में मूर्तिशिल्प, स्थाप्त्य, देवी प्रतिमाओं में उच्चतम प्रतिमान को स्थापित करता है। इनकी युगल प्रतिमाओं में प्रेम सौन्दर्य की मधुर बयार को अश्लीलता से दूर रखते हुए प्रदर्शित किया गया है। यदि आप इतिहास कला स्थापत्य में रुचि रखते हैं तो आपको यह देवालय जरूर देखना चाहिए क्योंकि जगत जैसा कोई नहीं।
ओम प्रकाश सोनी






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